खाली दिल, ख़ाली पैमाना
तनहा पल, मायूस हम.
तेरे बिन कैसे बतलायें
कितने हैं बेताब हम.
याद जो तेरी आती है तो आंख मेरी भर आती है .
रोना चाहूं, रो ना पाऊं, बस तू ही नज़र में आती है.
चंद पलों में यादों का सैलाब उमड यूं आता है,
पल में हंसता, पल में रोता, दिल मेरा घबराता है.
बेताबी में ज़ाना मेरा हाल बुरा हो जाता है.
टूट-बिखर जाता हूँ मेरा जीना दूभर होता है.
वक़्त सुबह से शाम चले, फिर रात कटे और दिन निकले,
ना जीने दे मुझे ज़िंदगी, और ना मौत ये मरने दे.
अब हैं हालात यही, और करना मुझको स्वीकार है.
अब अंत समय तक रहना मेरे दिल में तेरा प्यार है.
-अनुराग जैन
Kavita apni samajh me kam aati h, lekin padh kar achchha laga. Likhte rahiye.
ReplyDelete